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4 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा
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पश्चिम बंगाल में 18 सितंबर तक डेंगू के 5,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं, दिल्ली में डेंगू के मरीजों की संख्या 432 पर पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों से भी लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। डेंगू के साथ जिस चीज का सबसे ज्यादा जिक्र होता है, वह है प्लेटलेट्स।
डेंगू इतना खतरनाक इसीलिए हैं क्योंकि इसमें प्लेटलेट्स की संख्या अचानक कम हो जाती है। यह संख्या अगर 20,000 से नीचे पहुंच जाए तो ब्लीडिंग शुरू हो सकती है और यहां तक कि मौत भी हो सकती है।
इसलिए प्लेटलेट्स को समझना जरूरी है। यह क्या है, यह शरीर में क्या काम करता है और जीवन के लिए इतना क्रिटिकल क्यों है। साथ ही सामान्य स्थितियों में हेल्दी प्लेटलेट्स काउंट के लिए हमारी लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए।
प्लेटलेट्स से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों पर बात करेंगे, आज ‘जरूरत की खबर’ में। साथ ही जानेंगे कि-
- प्लेटलेट्स कम होने के क्या संकेत हैं?
- कौन-से फूड्स प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करते हैं?
एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- प्लेटलेट्स क्या है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- यह ब्लड में मौजूद छोटे-छोटे सेल फ्रैगमेंट (कोशिका के सूक्ष्म टुकड़े) होते हैं।
- इनका मुख्य काम चोट लगने या ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचने पर क्लॉट बनाकर ब्लीडिंग रोकना है।
- आसान शब्दों में कहें तो प्लेटलेट्स शरीर की प्राकृतिक ‘पट्टी’ की तरह काम करते हैं।
- यह चोट लगने पर ब्लड फ्लो को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
- प्लेटलेट्स को थ्रोम्बोसाइट्स (Thrombocytes) भी कहते हैं।
सवाल- प्लेटलेट्स का हमारे शरीर में क्या काम है?
जवाब- इन्हें ब्लड की ‘रिपेयरिंग यूनिट’ भी कह सकते हैं। जब शरीर में कहीं भी चोट लगती है और खून बहने लगता है तो प्लेटलेट्स तुरंत उस जगह पहुंच जाते हैं और खून को बहने से रोकते हैं। नीचे पॉइंटर्स में इनके सारे काम समझिए-
- खून बहना रोकते हैं: चोट लगने पर प्लेटलेट्स तुरंत क्षतिग्रस्त जगह पर पहुंचते हैं और वहां चिपकने लगते हैं।
- घाव पर अस्थायी ‘प्लग’ बनाते हैं: कई प्लेटलेट्स आपस में जुड़कर चोट वाली जगह को ढकने लगते हैं। इससे खून का बहाव कम हो जाता है।
- ब्लड क्लॉट बनाने में मदद करते हैं: इसके बाद शरीर की क्लॉटिंग प्रक्रिया सक्रिय होती है और खून का थक्का बनता है। इससे ब्लीडिंग रुकने में मदद मिलती है।
- ब्लड वेसल्स की रिपेयर में भूमिका: प्लेटलेट्स ऐसे केमिकल्स रिलीज करते हैं, जो आसपास की सेल्स को एक्टिव करते हैं और डैमेज्ड ब्लड वेसल्स की रिपेयर में मदद करते हैं।
- घाव भरने में भी योगदान: प्लेटलेट्स कुछ ऐसे सब्सटेंस रिलीज करते हैं, जो घाव भरने और टिश्यू की मरम्मत में भी मदद करते हैं।
सवाल- एक स्वस्थ शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कितनी होती है?
जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में आमतौर पर प्रति माइक्रोलीटर (µL) ब्लड में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्लेटलेट्स होते हैं। अगर प्लेटलेट्स की संख्या इस सामान्य सीमा से कम या ज्यादा हो जाए, तो डॉक्टर इसके कारण की जांच करते हैं।
सवाल- प्लेटलेट्स की संख्या जांचने के लिए कौन-सा टेस्ट होता है?
जवाब- प्लेटलेट्स की संख्या और उनकी कार्यक्षमता चेक के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। इनमें शामिल हैं-
- कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC): ब्लड में मौजूद रेड ब्लड सेल्स (RBC), व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) और प्लेटलेट्स की संख्या जांचने के लिए।
- पेरिफेरल ब्लड स्मीयर (PBS): प्लेटलेट्स के आकार, बनावट और असामान्य चीजों की जांच के लिए।
- ब्लड क्लॉटिंग टेस्ट: खून के थक्का बनने की क्षमता और उससे जुड़े फैक्टर्स की जांच के लिए।
- बोन मैरो बायोप्सी: प्लेटलेट्स बनाने वाली बोन मैरो सेल्स की स्थिति जानने के लिए।
- जेनेटिक टेस्ट: प्लेटलेट्स से जुड़ी आनुवंशिक गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए।
सवाल- किन बीमारियों में शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम हो सकती है?
जवाब- प्लेटलेट्स कम होना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का संकेत हो सकता है। किन बीमारियों या स्थितियों में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- डेंगू होने पर प्लेटलेट्स की संख्या क्यों गिरती है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- डेंगू वायरस बोन मैरो को प्रभावित कर सकता है, जहां प्लेटलेट्स बनते हैं। इससे कुछ समय के लिए नए प्लेटलेट्स का प्रोडक्शन कम हो सकता है।
- इन्फेक्शन के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम ज्यादा एक्टिव हो जाता है। इस वजह से प्लेटलेट्स तेजी से नष्ट हो सकते हैं।
- डेंगू में प्लेटलेट्स की खपत भी बढ़ जाती है। यानी शरीर में मौजूद प्लेटलेट्स सामान्य से ज्यादा तेजी से इस्तेमाल और नष्ट होते हैं।
- यही कारण है कि डेंगू में एक तरफ नए प्लेटलेट्स कम बनते हैं, जबकि दूसरी तरफ पुराने प्लेटलेट्स तेजी से खत्म होते रहते हैं। नतीजतन, प्लेटलेट्स की संख्या गिरने लगती है।
सवाल- क्या इन बीमारियों के अलावा सामान्य स्थिति में भी प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है?
जवाब- हां, कुछ स्थितियों में बिना किसी गंभीर बीमारी के भी प्लेटलेट्स की संख्या अस्थायी रूप से कम दिख सकती है, जैसेकि-
- वायरल इन्फेक्शन होने पर।
- प्रेग्नेंसी के दौरान।
- कुछ दवाओं के असर से।
- शरीर में पोषक तत्वों की कमी से।
कभी-कभी ब्लड सैंपल में प्लेटलेट्स आपस में चिपक जाने से भी रिपोर्ट में उनकी संख्या कम दिखाई दे सकती है। इसलिए एक बार प्लेटलेट्स कम आने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच करके कारण पता करते हैं।
सवाल- शरीर में प्लेटलेट्स कम होने के क्या संकेत हैं?
जवाब- जब प्लेटलेट्स का स्तर काफी कम होने लगता है, तो शरीर कुछ संकेत देता है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए-

सवाल- प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए कौन-से पोषक तत्व जरूरी हैं?
जवाब- प्लेटलेट्स बनाने के लिए शरीर को कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। हालांकि, कोई एक विटामिन या मिनरल अकेले प्लेटलेट्स नहीं बढ़ाता। प्लेटलेट्स का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें संतुलित पोषण अहम भूमिका निभाता है। प्लेटलेट्स के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या कोई फूड सीधे प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है?
जवाब- अभी तक ऐसा कोई फूड वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है, जो तुरंत प्लेटलेट्स बढ़ा दे। लेकिन कुछ पोषक तत्व प्लेटलेट्स बनने की प्रक्रिया को सपोर्ट जरूर करते हैं।
सवाल- कौन-से फूड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में मदद करते हैं?
जवाब- ग्राफिक में ऐसे फूड्स की लिस्ट देखिए-

सवाल- कौन-से फूड या आदतें प्लेटलेट्स के दुश्मन हो सकते हैं?
जवाब- कुछ फूड्स और लाइफस्टाइल हैबिट्स का प्लेटलेट्स प्रोडक्शन, उनकी कार्यक्षमता या शरीर की रिकवरी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जैसेकि-
- अनहेल्दी डाइट।
- ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाना।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं या सप्लीमेंट्स लेना।
- पर्याप्त नींद न लेना।
- लगातार स्ट्रेस में रहना।
- शराब पीना।
- स्मोकिंग करना।
- डेंगू, मलेरिया या अन्य इन्फेक्शन का समय पर इलाज न कराना।

सवाल- हेल्दी प्लेटलेट्स के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-
- बैलेंस्ड डाइट लें।
- हाइड्रेटेड रहें।
- रेगुलर 7-8 घंटे की क्वालिटी नींद लें।
- रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करें।
- किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर समय पर इलाज कराएं।
- स्मोकिंग न करें।
- शराब न पिएं।
- बिना डॉक्टरी सलाह के दवाएं या सप्लीमेंट्स न लें।
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
सवाल- क्या सिर्फ डाइट से प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य हो सकती है?
जवाब- नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्लेटलेट्स कम क्यों हुए हैं। अगर प्लेटलेट्स किसी पोषण संबंधी कमी की वजह से कम हुए हैं, तो सही डाइट और जरूरी सप्लीमेंट्स मदद कर सकते हैं। अगर इसकी वजह कोई बीमारी (डेंगू, मलेरिया, लिवर डिजीज) है तो ऐसे में बीमारी का इलाज जरूरी है।
प्लेटलेट्स से जुड़े कॉमन मिथ फैक्ट्स
1. मिथ- कीवी, पपीता खाने से प्लेटलेट्स तुरंत बढ़ जाते हैं।
फैक्ट- ये दोनों चीजें पोषक तत्वों से भरपूर हैं, लेकिन ये प्लेटलेट्स बढ़ाने की रामबाण दवा नहीं हैं।
2. मिथ- प्लेटलेट्स कम हैं तो सिर्फ आयरन खाने से बढ़ जाएंगे।
फैक्ट- अगर कमी का कारण आयरन की कमी है, तो उसका इलाज मदद कर सकता है। हर मामले में आयरन लेने की जरूरत नहीं होती।
3. मिथ- प्लेटलेट्स जितने ज्यादा, उतना बेहतर।
फैक्ट- शरीर को प्लेटलेट्स की सामान्य मात्रा चाहिए। बहुत ज्यादा या बहुत कम, दोनों स्थितियां ठीक नहीं हैं।
4. मिथ- डेंगू में प्लेटलेट्स गिरें तो तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी है।
फैक्ट- हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। फैसला प्लेटलेट काउंट, ब्लीडिंग और मरीज की स्थिति देखकर किया जाता है।
5. मिथ- प्लेटलेट्स कम होने पर दूध-दही नहीं खाना चाहिए।
फैक्ट- सामान्य तौर पर प्लेटलेट्स कम होने पर दूध और दही बंद करने की जरूरत नहीं होती, जब तक डॉक्टर ने कोई विशेष कारण न बताया हो।
6. मिथ- प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए ज्यादा विटामिन या सप्लीमेंट लेना चाहिए।
फैक्ट- सप्लीमेंट तभी लेना चाहिए, जब कमी हो या डॉक्टर सलाह दें। जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान भी कर सकता है।
7. मिथ- प्लेटलेट्स कम होने का मतलब गंभीर बीमारी है।
फैक्ट- जरूरी नहीं है। कभी-कभी संक्रमण या जांच के दौरान प्लेटलेट्स आपस में चिपकने से भी रिपोर्ट में संख्या कम दिख सकती है।
मिथ 8- प्लेटलेट्स कम होने का मतलब हमेशा डेंगू होता है।
फैक्ट- जरूरी नहीं है। कई अन्य बीमारियों और हेल्थ कंडीशंस में भी प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं।
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